संस्कृत श्लोक और हिंदी व्याख्या
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय।।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय।।
हिंदी व्याख्या: इस श्लोक में महाराज धृतराष्ट्र ने संजय से पूछा है कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में एकत्रित हुए मेरे पुत्रों और पाण्डवों ने क्या किया? यह श्लोक महाभारत के युद्ध का आरंभ है, जहाँ धर्म और अधर्म का युद्ध हुआ था।
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।
हिंदी व्याख्या: इस श्लोक में श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म का महत्व समझा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की इच्छा करने में नहीं। इसलिए बिना फल की चिंता किए हुए कर्म करते रहो। यह श्लोक कर्मयोग का सार बताता है।
Comments
Post a Comment